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मुश्किलों से खंड खंड हो जाऊं
ऐसी मृण मूरत मै नहीं।
जकड़ जाए राह के मोह में
ऐसी भोली सूरत मैं नहीं।
पत्थर को पिघला सकता हूँ
ये घमंड नहीं साहसी वक्तव्य हैं मेरे ।
हर उस विपदा को लांघ जाऊं
चाहे आएं राह में गिरि -कण्टक बहुतेरे।
मैं तो बस इतना जानूं .........
मुश्किलों से खंड खंड हो जाऊं
ऐसी मृण मूरत मै नहीं।
जकड़ जाए राह के मोह में
ऐसी भोली सूरत मैं नहीं।
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ये घमंड नहीं साहसी वक्तव्य हैं मेरे ।
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