मैं तो सपनों में अब तक............
वो कहते हैं-
मैं तो सपनों में अब तक,
उनके खोया नहीं..
मन मंदिर में उनको,
बसाकर सोया नहीं।
लेकिन मैं कहता हूँ -
क्युंके हैं घाव पुराने मेरे अपने कहीं,
मैने अब तलक , है उनको धोया नहीं।
मैं तो सपनों में अब तक............
एक धागे में जो मैं बंध गया ,
दूजे धागे में खुद को पिरोया नहीं।
घूँट लहू के पिलाए इक दर्द ने,
और कह गए के,मैं अब तक रोया नहीं।
कोई देखे और कहे जा के उनसे,
एक भी रात तबसे,मैं तो सोया नहीं।
मैं तो सपनों में अब तक............
"राही "
किशोर आचार्य
वो कहते हैं-
मैं तो सपनों में अब तक,
उनके खोया नहीं..
मन मंदिर में उनको,
बसाकर सोया नहीं।
लेकिन मैं कहता हूँ -
क्युंके हैं घाव पुराने मेरे अपने कहीं,
मैने अब तलक , है उनको धोया नहीं।
मैं तो सपनों में अब तक............
एक धागे में जो मैं बंध गया ,
दूजे धागे में खुद को पिरोया नहीं।
घूँट लहू के पिलाए इक दर्द ने,
और कह गए के,मैं अब तक रोया नहीं।
कोई देखे और कहे जा के उनसे,
एक भी रात तबसे,मैं तो सोया नहीं।
मैं तो सपनों में अब तक............
"राही "
किशोर आचार्य
Nice...
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