मंजिलें
मंजिलें तो विरासत में भी मिलती हैं
कोई खुद मंजिल पाकर दिखाए।
चमकते तो तारे भी हैं सूरज से
कोई सूरज बनके चमक कर दिखाए।
जो चाँदी का चम्मच मुँह में लेकर पैदा हुए
कोई सूरज बनके चमक कर दिखाए।
जो चाँदी का चम्मच मुँह में लेकर पैदा हुए
वो विजय का रस क्या जाने।
पग पग पर जो चाहे मिले उनको
खून पसीने की रोटी का रस वो क्या जाने।
पग पग पर जो चाहे मिले उनको
खून पसीने की रोटी का रस वो क्या जाने।
जीत का जश्न तो बस उसका भागी
जो जीवन राह पर पानी सम पसीना बहाए।
हर कण्टकपूर्ण राह को आसाँ बनाकर
मुस्कुराते हुए मंजिल को अपनी चलते जाए।
जो जीवन राह पर पानी सम पसीना बहाए।
हर कण्टकपूर्ण राह को आसाँ बनाकर
मुस्कुराते हुए मंजिल को अपनी चलते जाए।
"राही "
किशोर आचार्य
शानदार👌👌👌
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